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Home व्‍यापार

नीति आयोग ने “व्यापार निगरानी तिमाही” का छठा संस्करण किया जारी

Mochan Samachaar Desk by Mochan Samachaar Desk
13/02/2026
in व्‍यापार
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नीति आयोग ने “व्यापार निगरानी तिमाही” का छठा संस्करण किया जारी
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नयी दिल्‍ली : नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री सुमन बेरी ने 13 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई–सितंबर 2025) के लिए “व्यापार निगरानी तिमाही” प्रकाशन का नवीनतम संस्करण जारी किया। यह प्रकाशन नीति आयोग के सदस्य डॉ. अरविंद विरमानी तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में जारी किया गया।

जिस समय वैश्विक व्यापार की वृद्धि की गति धीमी हुई है, यह प्रकाशन वैश्विक और घरेलू व्यापार रुझानों का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। हालांकि विश्व व्यापार में धीमी प्रगति के बावजूद सकारात्मक रुख में है। वस्तुओं की तुलना में सेवाओं का प्रदर्शन बेहतर रहा है तथा विकासशील क्षेत्र प्रमुख प्रेरक शक्ति के रूप में उभर रहे हैं। इस तिमाही के संस्करण का विषयगत खंड भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापार पर केंद्रित है। इसमें वैश्विक मांग के स्वरूप, मोबाइल फोन, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स तथा इसके घटकों में भारत के निर्यात विस्तार, और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी का विश्लेषण किया गया है। साथ ही, प्रतिस्पर्धात्मकता सुदृढ़ करने, मूल्य संवर्धन को गहरा करने और निर्यात प्रदर्शन को बेहतर बनाने हेतु आवश्यक संरचनात्मक बाधाओं, नीतिगत अंतरालों और प्राथमिक हस्तक्षेपों की पहचान की गई है।

यह विश्लेषण रेखांकित करता है कि वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के व्यापार विस्तार को गति देने में निर्यात की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। सेवाओं और वस्तु निर्यात में लगभग 8.5 प्रतिशत की सशक्त वृद्धि दर्ज की गई, जो वस्तुओं और सेवाओं दोनों के आयात वृद्धि से अधिक रही। संरचनात्मक स्तर पर, यह संस्करण विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि को रेखांकित करता है, जो वर्ष 2005 से लगभग चार गुना बढ़ चुका है और अब वैश्विक निर्यात में इसकी हिस्सेदारी उत्तरोत्तर अधिक हो रही है। क्षेत्रीय मूल्य श्रृंखलाओं और नए व्यापार गलियारों के माध्यम से भारत की व्यापार दिशा इस ‘ग्लोबल साउथ’ संतुलन के साथ अधिकाधिक संरेखित होती जा रही है। यह संस्करण ई-कॉमर्स की बढ़ती भूमिका को भी भविष्य के निर्यात वृद्धि के प्रमुख माध्यम के रूप में रेखांकित करता है। भारत वर्तमान में विश्व के शीर्ष छह ई-कॉमर्स बाज़ारों में शामिल है, जहाँ ऑनलाइन खुदरा में इलेक्ट्रॉनिक्स की हिस्सेदारी लगभग आधी है। यद्यपि ई-कॉमर्स निर्यात अभी सीमित स्तर पर है, किंतु इसमें तेजी से विस्तार की संभावना है और अनुमान है कि वर्ष 2030 तक ये भारत के वस्तु निर्यात में 20–30 प्रतिशत तक योगदान दे सकता है। यह वृद्धि लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार, नियामकीय सुगमता तथा एमएसएमई की बढ़ती भागीदारी से समर्थित होगी।

इस तिमाही के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र पर भी विशेष फोकस है जो भारत के विनिर्माण और निर्यात का स्वरूप बदलने का एक प्रमुख आधार बनकर उभरा है। यह अब भारत के निर्यात में दूसरा सबसे बड़ा मद है। यह क्षेत्र प्रौद्योगिकी-आधारित होने के साथ-साथ ऑटोमोबाइल, नवीकरणीय ऊर्जा, दूरसंचार, रक्षा और डिजिटल सेवाओं जैसे उद्योगों से गहराई से जुड़ा हुआ है, जिससे यह औद्योगिक विकास का एक प्रभावी गुणक सिद्ध होता है।

वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मांग में वर्ष 2015 से 2024 के बीच भारत की हिस्सेदारी 17.2 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सी ए जी आर) से बढ़ी है, जो वैश्विक वृद्धि दर 4.4 प्रतिशत से कहीं अधिक है। यह वृद्धि मुख्यतः मोबाइल फोन निर्यात में तेजी से हो रही बढ़ोत्तरी के कारण संभव हो रही है। वर्ष 2016 से 2024 के बीच इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात लगभग पाँच गुना बढ़कर 42.1 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया। वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापार का मूल्य 4.6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है, जिससे यह विश्व अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े और त्वरित गति से विकसित होने वाले क्षेत्रों में से एक बनता है। मोबाइल फोन, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार उपकरण जैसे उत्पादों में भारत ने विशेष मजबूती प्रदर्शित की है, और इनका निर्यात मुख्यतः अमेरिका, ब्रिटेन तथा संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख अंतिम-उपभोग बाजारों की ओर उन्मुख है।

असेंबली और सिस्टम इंटीग्रेशन में मजबूत दखल स्थापित करने के बाद भारत अब इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के अगले चरण में प्रवेश कर रहा है, जहाँ ध्यान उपकरणों के निर्माण और उच्च मूल्य संवर्धन की ओर केंद्रित है। लक्षित नीतिगत उपायों की सहायता से यह परिवर्तन हो रहा है, जिनमें केंद्रीय बजट के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना के लिए 40,000 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है, जिसका उद्देश्य घरेलू क्षमताओं को सुदृढ़ करना है।

यह विश्लेषण रेखांकित करता है कि दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता तभी बढ़ेगी जब वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य श्रृंखलाओं में गहराई से एकीकरण किया जाएगा। इसमें प्रिंटेड सर्किट बोर्ड डिज़ाइन, सेमीकंडक्टर असेंबली एवं परीक्षण, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स तथा एम्बेडेड सिस्टम्स जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है। लॉजिस्टिक्स दक्षता में निरंतर सुधार, शुल्क में अनुकूलन और उद्योग-संगत कौशल विकास के साथ मिलकर ये परिवर्तन आगामी दशक में इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को भारत के निर्यात होने वाली वृद्धि और तकनीकी प्रगति का प्रमुख इंजन बनाएंगे।

इस अवसर पर अपने सम्बोधन में श्री सुमन बेरी ने कहा कि आधुनिक विनिर्माण मूल्य श्रृंखलाओं के संगठित केंद्र के रूप में इलेक्ट्रॉनिक्स—विशेषकर सेमीकंडक्टर और अन्य घटक — व्यापार संतुलन और तकनीकी क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि यद्यपि भारत ने अंतिम असेंबली में व्यापक विस्तार कर लिया है, लेकिन फिर भी दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए संरचनात्मक लागत बाधाओं को दूर करना, घरेलू घटक पारितंत्र को सुदृढ़ करना और प्रमुख निवेशों के माध्यम से भारतीय कंपनियों को वैश्विक उत्पादन नेटवर्क में अधिक मजबूती से स्थापित करना आवश्यक होगा।

नीति आयोग के सदस्य डॉ. अरविंद विरमानी ने समयानुकूल विश्लेषणात्मक रूप से सुदृढ़ इस संस्करण को तैयार करने के लिए टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ गहन एकीकरण, मध्यम अवधि में भारत की निर्यात गति को बनाए रखने, उत्पादकता बढ़ाने और गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।

यह संस्करण नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत, शोधकर्ताओं और अकादमिक जगत के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन है, जो डेटा-आधारित विश्लेषण और भावी नीतिगत अंतर्दृष्टियों के माध्यम से सूचित निर्णय-निर्माण को प्रोत्साहित करता है तथा गतिशील वैश्विक परिदृश्य में भारत की व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करने में सहायक है।

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Tags: NITI AAYOG
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