कोलकाता : ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर. एन. रवि ने गैर-लाभकारी संस्था हेल्प अस हेल्प देम (HUHT) द्वारा स्थापित आवासीय उत्कृष्टता केंद्र ‘अधिगम भूमि’ का दौरा किया। संस्था द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की अवधारणा पर आधारित एक ऐसे अभिनव एवं व्यवहारिक शिक्षा मॉडल का अवलोकन किया, जो पारंपरिक शैक्षणिक पाठ्यक्रम को ग्रामीण जीवनोपयोगी कौशलों के साथ जोड़ते हुए ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में प्रभावी पहल प्रस्तुत करता है।
राज्यपाल ने पूर्णतः निःशुल्क आवासीय शिक्षा प्राप्त कर रही लगभग 1,000 जनजातीय एवं ग्रामीण छात्राओं से संवाद किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों से आए अभिभावकों से भी बातचीत की तथा विद्यार्थियों द्वारा संचालित विभिन्न शिक्षण गतिविधियों का अवलोकन किया। इन गतिविधियों में 18 समेकित कौशल क्षेत्रों का प्रदर्शन किया गया, जिनका आधार रोटी (कृषि), कपड़ा (वस्त्र निर्माण) और मकान (ग्रामीण वास्तुकला) है। इसके साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता जैसे विषयों को गणित, विज्ञान एवं भाषाओं जैसी मुख्य शैक्षणिक विषयवस्तु के साथ अनुभवात्मक शिक्षण पद्धति के माध्यम से जोड़ा गया है।
अधिगम भूमि केवल एक आवासीय शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि शिक्षा के विस्तार योग्य मॉडल को विकसित करने वाली एक प्रयोगशाला के रूप में कार्य कर रहा है। संस्था की “अपनी मिट्टी से जुड़ी शिक्षा” अवधारणा को 100 स्कूल्स प्रोजेक्ट (अधिगम ग्राम शिक्षा अभियान) के माध्यम से पहले ही सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है, जिसके अंतर्गत पश्चिम बंगाल के कम शुल्क वाले निजी विद्यालयों में 10,000 से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिला है। इस मॉडल को व्यापक स्तर पर लागू करने के उविद्यार्थियहेल्प अस हेल्प देम (HUHT) ने एक समग्र एवं तत्काल क्रियान्वयन योग्य पैकेज तैयार किया है। इसमें शिक्षक पुस्तिकाएं, छात्र अध्ययन सामग्री, मूल्यांकन प्रणाली तथा निगरानी तंत्र शामिल हैं, जिन्हें राज्य बोर्ड के वर्तमान पाठ्यक्रम में बिना किसी व्यवधान के सहज रूप से समाहित किया जा सकता है।
इस पहल की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए मुक्ति ग्रुप की प्रबंध निदेशक एवं हेल्प अस हेल्प देम (HUHT) की संस्थापक मुक्ति गुप्ता ने कहा, “हमारी मूल अवधारणा ‘अपनी मिट्टी से जुड़ी शिक्षा’ का उद्देश्य बच्चों को उनकी स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक कौशलों से जोड़ते हुए उन्हें आधुनिक जीवन एवं आजीविका के लिए तैयार करना है। व्यावहारिक एवं अनुभव आधारित शिक्षा को शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ जोड़कर हम एक ऐसा विस्तार योग्य शैक्षिक तंत्र विकसित कर रहे हैं, जो ग्रामीण नवाचार और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करता है। हमारा विश्वास है कि आज के ये विद्यार्थी भविष्य में ग्रामीण उद्यमी बनकर अपने गांवों में उद्योग स्थापित करेंगे, स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाएंगे, रोजगार के नए अवसर सृजित करेंगे और विकसित भारत 2047 के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। हम दृढ़ता से मानते हैं कि कौशल-आधारित शिक्षा बच्चों को रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाएगी और यही ग्रामीण भारत के वास्तविक परिवर्तन का आधार बनेगी।”
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