कोलकाता : स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल), सी.एम.ओ., कोलकाता कार्यालय के समन्वय में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (उपक्रम-2), कोलकाता की छमाही बैठक का आयोजन 25 अगस्त 2026 को धनधान्यो सभागार, कोलकाता में किया गया। बैठक की अध्यक्षता सेल, सी.एम.ओ. के कार्यपालक निदेशक (वित्त एवं लेखा) एवं नराकास (उपक्रम-2), कोलकाता के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र कुमार शर्मा ने की। समारोह में पश्चिम बंगाल सरकार के माननीय राज्य मंत्री, संसदीय कार्य एवं नगर विकास तथा नगर पालिका कार्य, श्री उमेश राय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इस अवसर पर श्री सुरेन्द्र कुमार शर्मा, कार्यपालक निदेशक एवं अध्यक्ष, नराकास (उपक्रम-2), सेल, सी.एम.ओ.; श्री रथेन्द्र रमण, अध्यक्ष, श्यामप्रसाद मुखर्जी पोर्ट; श्री सम्राट राही, उपाध्यक्ष, श्यामप्रसाद मुखर्जी पोर्ट; कोमोडोर राकेश छीलर, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, दि ब्रेथवेट बर्न एंड जेसप कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड; कोमोडोर पी.आर. हरि, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड, कोलकाता; श्री अनंत मोहन सिंह, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एंड्रयू यूल एंड कंपनी लिमिटेड; श्री आर. वीराबाहु, निदेशक (वित्त), ब्रेथवेट एंड कंपनी लिमिटेड; श्री बसंत कुमार भुयाँ, क्षेत्रीय कार्यपालक निदेशक, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण; श्री सुरजीत बनर्जी, कार्यपालक निदेशक – ग्रिड इंडिया, श्री मनोज कुमार, कार्यकारी निदेशक – इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड सहित विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों के कार्यालय प्रमुख एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सेल के मुख्य महाप्रबंधक (मानव संसाधन) एवं समिति के सचिव श्री प्रशांत ओझा ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा समिति का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

बैठक में भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग के उप निदेशक (कार्यान्वयन) डॉ. विचित्रसेन गुप्त तथा उप निदेशक (पूर्व), हिंदी शिक्षण योजना, श्री जितेंद्र प्रसाद विशेष रूप से उपस्थित रहे। कोलकाता महानगर में स्थित भारत सरकार के राजभाषा विभाग के कार्यालयों तथा विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों के कार्यालय प्रमुखों एवं हिंदी कक्ष के अधिकारियों सहित लगभग 120 प्रतिनिधियों ने बैठक में सहभागिता की।
बैठक के दौरान विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों में राजभाषा कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा की गई। डॉ. विचित्रसेन गुप्त ने राजभाषा कार्यान्वयन की स्थिति की समीक्षा करते हुए इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। श्री जितेंद्र प्रसाद ने हिंदी शिक्षण एवं प्रशिक्षण से संबंधित जानकारी प्रदान की, जबकि केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो के श्री एस.के. श्रीवास्तव ने अनुवाद कार्यों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
मुख्य अतिथि श्री उमेश राय ने अपने संबोधन में कहा कि कोलकाता को खड़ी बोली हिंदी के विकास की महत्वपूर्ण भूमि माना जाता है। उन्होंने कहा कि इसी शहर में आचार्य केशव चंद्र सेन ने हिंदी को राष्ट्रभाषा की संज्ञा दी थी तथा फोर्ट विलियम कॉलेज में हिंदी की पाठ्य-पुस्तकों के निर्माण का महत्वपूर्ण कार्य हुआ। उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा के व्यापक रूप से स्वीकार किए जाने के लिए उसमें सर्वव्यापकता, प्रचुर साहित्य-सृजन, सरलता, वैज्ञानिकता तथा विभिन्न भावों को अभिव्यक्त करने की क्षमता जैसे गुण आवश्यक हैं और हिंदी में ये सभी गुण विद्यमान हैं।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए श्री सुरेन्द्र कुमार शर्मा ने कहा कि किसी भी उन्नत राष्ट्र के निर्माण में भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आधुनिक सूचना एवं प्रौद्योगिकी के युग में अपनी भाषा के माध्यम से हम एक-दूसरे से और अधिक मजबूती से जुड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी हमारे भीतर देशप्रेम की भावना का संचार करने के साथ-साथ आपसी संपर्क को भी सुदृढ़ करती है। उन्होंने कहा कि ‘ग’ क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद कोलकाता में हिंदी को अधिकाधिक कार्यालयीन कार्यों की भाषा बनाने के लिए नराकास (उपक्रम-2) द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजभाषा हिंदी का प्रभावी प्रयोग, उसका प्रचार-प्रसार और कार्यान्वयन किसी एक व्यक्ति अथवा विभाग के प्रयास से संभव नहीं है; इसके लिए सभी कार्यालयों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सामूहिक और सतत प्रयास आवश्यक हैं।
कार्यक्रम का संचालन राजभाषा अधिकारी एवं सह-सदस्य सचिव, सेल, सी.एम.ओ., मुख्यालय, कोलकाता, श्री अजय शंकर मिश्र ने किया। डॉ. विजय मोहन बरेजा, महाप्रबंधक (राजभाषा), ऑयल इंडिया लिमिटेड, कोलकाता ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
बैठक में राजभाषा हिंदी के प्रभावी कार्यान्वयन, हिंदी प्रशिक्षण, अनुवाद कार्य तथा कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग को बढ़ावा देने के संबंध में सार्थक विचार-विमर्श हुआ। बैठक ने विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों के बीच राजभाषा कार्यान्वयन के क्षेत्र में समन्वय, अनुभव-साझाकरण और सामूहिक प्रयासों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।
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