कोलकाता : सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने शनिवार को यहां कहा कि सदी पुराने कलकत्ता शेयर बाजार (सीएसई) को दोबारा शुरू करने का फैसला कारोबार की पर्याप्त मात्रा, एक टिकाऊ कारोबारी मॉडल और प्रौद्योगिकी में भारी निवेश करने की क्षमता पर निर्भर करेगा।
पश्चिम बंगाल सरकार ने शेयर बाजार को फिर से शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। इस बारे में एक सवाल का जवाब देते हुए पांडेय ने कहा कि मौजूदा विनियामक ढांचा नए शेयर बाजार की संभावना से इनकार नहीं करता है, लेकिन ऐसे किसी भी प्रस्ताव को निर्धारित व्यवस्था और पूंजी आवश्यकताओं संबंधी निर्देशों को पूरा करना होगा।
उन्होंने कहा कि जब देश भर में क्षेत्रीय शेयर बाजार संचालित होते थे, तब से बाजार काफी बदल चुका है। अब इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग की वजह से निवेशक कहीं से भी बाजारों तक पहुंच सकते हैं। पांडेय ने कहा, ”शेयर बाजार होना एक बात है। लेकिन क्या आप इसे वास्तव में व्यावहारिक बना पाएंगे, यह दूसरी बात है।” उन्होंने कहा कि किसी भी नए बाजार के लिए नकदी पर विचार करना होगा, इसके प्रवर्तकों को यह साबित करना होगा कि इसके संचालन को बनाए रखने के लिए पर्याप्त ग्राहक इस मंच पर कारोबार करेंगे। नियामक अनुपालन मुद्दों के कारण सीएसई में अप्रैल 2013 से कारोबार बंद है।
टाटा समूह से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रख रहा है
सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने शनिवार को कहा कि बाजार नियामक टाटा समूह की मूल कंपनी के स्तर में प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रख रहा है। उन्होंने कहा कि समूह की सूचीबद्ध कंपनियां और उनके प्रवर्तक सेबी के खुलासे तथा अनुपालन संबंधी नियमों के दायरे में आते हैं। पांडेय की यह टिप्पणी टाटा समूह की मूल कंपनी टाटा संस में प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर मतभेदों के बीच आई है। इनमें एन चंद्रशेखरन की चेयरमैन के रूप में दोबारा नियुक्ति और कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने का प्रस्ताव शामिल है।
पांडेय ने भारत चैंबर इन्वेस्टर्स फोरम की शुरुआत के मौके पर आयोजित कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से कहा, ‘‘मूल कंपनी के स्तर पर कुछ मुद्दे हैं, क्योंकि वह वास्तव में सूचीबद्ध कंपनी नहीं है। समूह की बाकी सूचीबद्ध कंपनियां सभी एलओडीआर (सूचीबद्धता दायित्व एवं खुलासा आवश्यकताएं) नियमों का पालन करती हैं।’’ उन्होंने कहा कि इन सूचीबद्ध कंपनियों और उनके प्रवर्तकों पर सेबी के सभी नियम लागू होते हैं।
यह पूछे जाने पर कि क्या सेबी टाटा समूह के घटनाक्रम पर नजर रख रहा है, पांडेय ने कहा, ‘‘हां… मेरा मतलब है कि हमें सभी घटनाक्रम पर लगातार नजर रखनी होती है।’’ टाटा समूह की वित्त वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार, समूह की 26 सूचीबद्ध कंपनियां हैं, जिनका संयुक्त बाजार पूंजीकरण 31 मार्च, 2025 तक 328 अरब अमेरिकी डॉलर था।
सलाहकार फर्म इनगवर्न के विश्लेषण के अनुसार, इनमें से सात सूचीबद्ध कंपनियों के पास सामूहिक रूप से टाटा संस की करीब 11.92 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इन कंपनियों के 1.77 करोड़ से अधिक शेयरधारक खाते हैं। इन सात कंपनियों में टाटा स्टील, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, टाटा केमिकल्स, टाटा पावर, इंडियन होटल्स, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन शामिल हैं।
सेबी मजबूत पूंजी बाजारों को बढ़ावा दे रहा, निवेशकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान
चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि नियामक देश के पूंजी बाजारों को अधिक सुगम, कुशल और मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि सेबी का मुख्य ध्यान पूंजी निर्माण को सुगम बनाने, कारोबारी सुगमता में सुधार करने और निवेशकों की सुरक्षा को मजबूत करने पर है।
उन्होंने यहां ‘भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स इन्वेस्टर्स फोरम’ में पूंजी बाजार के विस्तार पर कहा कि पिछले दशक में बाजार पूंजीकरण में जोरदार वृद्धि हुई है, जिसमें कंपनियां इक्विटी और ऋण निर्गमों के जरिये सालाना औसतन 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक जुटा रही हैं। उन्होंने कहा, ”हम व्यवसायों के लिए बाजारों को लगातार मजबूत कर रहे हैं। साथ ही उतनी ही प्राथमिकता निवेशकों की सुरक्षा भी है। विश्व स्तरीय बाजार न केवल सामान्य समय में कुशल होने चाहिए, बल्कि तनाव के दौरान भी लचीले होने चाहिए।”
पांडेय ने कहा कि ये उद्देश्य एक-दूसरे का समर्थन करते हैं। उन्होंने बताया कि पूंजी बाजार में पश्चिम बंगाल की भागीदारी काफी बढ़ गई है, और यहां निवेशकों की संख्या वित्त वर्ष 2014-15 के लगभग 12 लाख से बढ़कर आज 90 लाख से अधिक हो गई है, जिनमें से लगभग 36 प्रतिशत युवा निवेशक 30 वर्ष से कम आयु के हैं।
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