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व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयात की जाने वाली वस्तुओं पर लगने वाले टैरिफ दर को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किया जाएगा,पढे़ पूरें बजट का सारांश

Mochan Samachaar Desk by Mochan Samachaar Desk
01/02/2026
in देश, व्‍यापार
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व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयात की जाने वाली वस्तुओं पर लगने वाले टैरिफ दर को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किया जाएगा,पढे़ पूरें बजट का सारांश
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नयी‍ द‍िल्‍ली :  केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया।

भाग-क

वित्त मंत्री ने कहा कि माघ पूर्णिमा के पवित्र अवसर और गुरु रविदास की जन्म जयंती के मौके पर कर्तव्य भवन में तैयार हुआ यह पहला बजट 3 कर्तव्यों से प्रेरित हैः

पहला कर्तव्य है- उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ाते हुए तथा उथल-पुथल भरी वैश्विक स्थिति के प्रति सहनीयता का निर्माण करके आर्थिक वृद्धि को तेज करना तथा इसे बनाए रखना ।

दूसरा कर्तव्य है- लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और उनके क्षमता का निर्माण करना; भारत की समृद्धि के मार्ग में उन्हें मजबूत भागीदार बनाना।

तीसरा कर्तव्य सबका साथ-सबका विकास के विज़न से जुड़ा है। यह सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक परिवार, समुदाय, क्षेत्र के पास संसाधनों, सुविधाओं तथा सार्थक भागीदारी के लिए अवसरों तक पहुंच की सुविधा हो।

युवा शक्ति संचालित बजट, जो गरीब, शोषित और वंचित समुदायों के प्रति सरकार के संकल्प पर जोर देता है, पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि देश विकसित भारत हासिल करने की दिशा में विश्वास से भरे कदम उठाता रहेगा, समावेश के साथ महत्वाकांक्षा का संतुलन करेगा। बढ़ते व्यापार और पूंजी की जरूरतों के साथ एक बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में भारत को वैश्विक बाजारों के साथ मजबूती से एकीकृत होना चाहिए, निर्यात में वृद्धि करनी चाहिए तथा लम्बी अवधि के स्थिर निवेश को आकर्षित करना चाहिए।

उन्होंने उल्लेख किया कि देश बाहरी वातावरण का सामना कर रहा है, जिसमें व्यापार और बहु-पक्षवाद को नुकसान हुआ है तथा संसाधनों और आपूर्ति श्रृंखलाओं तक पहुंच में बाधाएं आई है। नई तकनीकें निर्माण प्रणालियों में बदलाव ला रही है, जबकि जल, ऊर्जा तथा महत्वपूर्ण खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है।

वित्त मंत्री ने कहा कि 2025 के स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद, 350 से ज्यादा सुधारों की शुरूआत की गई है। इनमें जीएसटी सरलीकरण, श्रम संहिताओं की अधिसूचना, अनिवार्य गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों का युक्तिकरण शामिल है। उच्च स्तरीय समितियां गठित की गई है और इसके साथ नियम समाप्त करने तथा अनिपालन जरूरतों को कम करने के लिए केन्द्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर काम कर रही है।

पहला कर्तव्य आर्थिक वृद्धि को तेज करना व बनाए रखना है। पहले कर्तव्य के तहत छह क्षेत्रों में हस्तक्षेप कार्यक्रमों का प्रस्ताव दिया गया है।

  1. 7 रणनीतिक और सीमा क्षेत्रों में विनिर्माण का विस्तार करना
  2. विरासत औद्योगिक क्षेत्रों का पुनर्निर्माण करना
  3. चैम्पियन एमएसएमई बनाना
  4. अवसंरचना पर सशक्त बल देना
  5. लम्बी अवधि की ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता को सुनिश्चित करना
  6. नगर आर्थिक क्षेत्र विकसित करना

वैश्विक बायोफॉर्मा निर्माण केन्द्र के रूप में भारत को विकसित करने के लिए बायोफॉर्मा शक्ति, जिसका कुल परिव्यय 10,000 करोड़ रुपये है, बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स के घरेलू उत्पादन के लिए अगले पांच वर्षों में इको-सिस्टम का निर्माण करेगी। रणनीति में शामिल है- तीन नए राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईपीईआर) और सात वर्तमान संस्थानों के उन्नयन के साथ बायोफॉर्मा पर केन्द्रित नेटवर्क। यह 1000 मान्यता प्राप्त भारत क्लिनिक जांच स्थलों के एक नेटवर्क का निर्माण करेगा। वैश्विक मानक हासिल करने तथा एक समर्पित वैज्ञानिक समीक्षा कैडर व विशेषज्ञों के माध्यम से समयावधि मंजूर करने के लिए केन्द्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन को मजबूत किया जाएगा।

श्रम गहन वस्त्र क्षेत्र के लिए, पांच उपभागों के साथ एकीकृत कार्यक्रम का प्रस्ताव किया गया हैः

रेशम, ऊन और जूट जैसे प्राकृतिक फाइबर, मानव निर्मित फाइबर और नए युग के फाइबरों में आत्मनिर्भरता के लिए राष्ट्रीय फाइबर योजना; मशीनरी, प्रौद्योगिकी उन्नयन और सामान्य परीक्षण एवं प्रमाणन केन्द्रों के लिए पूंजीगत सहायता के साथ पारम्परिक क्लस्टरों के आधुनिकीकरण के लिए वस्त्र विस्तार एवं रोजगार योजना; मौजूदा योजनाओं को एकीकृत एवं सुदृढ़ करने और बुनकरों एवं कारीगरों के लिए लक्षित सहायता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प कार्यक्रम; वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ वस्त्र और परिधानों को बढ़ावा देने के लिए टेक्स-इको पहल; उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से वस्त्र कौशल इको-सिस्टम के आधुनिकीकरण और उन्नयन के लिए समर्थ 2.0 ।

विकास के प्रमुख इंजन के रूप में एमएसएमई को मान्यता देते हुए, 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई विकास निधि का प्रस्ताव दिया गया है ताकि भविष्य के चैम्पियनों का निर्माण किया जा सके और निर्धारित विशेषताओं के आधार पर उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जा सके।

वित्त मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में गुणात्मक वृद्धि हुई है जो वित्त वर्ष 2014-15 के 2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर बीई 2025-26 में 11.2 लाख करोड़ रुपये हो गई है। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि इस गति को बनाए रखने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में इसे बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया जाएगा।

कार्गो के पर्यावरण रूप से टिकाऊ आवाजाही को बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्री ने नए समर्पित फ्रेट कॉरिडोर का प्रस्ताव दिया, जो पूर्व में दानकुनी को पश्चिम के सूरत से जोड़ेगा; अगले पांच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों (एनडब्ल्यू) का संचालन प्रारंभ होगा। इसकी शुरूआत ओड़िशा में एनडब्ल्यू 5 से की जाएगी, जो खनिज की प्रचुरता वाले क्षेत्र तालचर और अंगुल व कलिंग नगर जैसै औद्योगिक केन्द्र को पारादीप और घामरा पत्तनों से जोड़ेगा। आवश्यक कार्यबल के विकास के लिए क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्रों के रुप में प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना की जाएगी।

इस बजट का लक्ष्य शहरी आर्थिक क्षेत्रों के विशिष्ट विकास कारकों के आधार पर, शहरी आर्थिक क्षेत्रों (सीईआर) का मानचित्रण करके समूहों की आर्थिक स्थिति का उपयोग करने के लिए शहरों की क्षमता को और अधिक बढ़ाना है। सुधार-सह-परिणाम आधारित वित्तपोषण तंत्र से चुनौती मोड के माध्यम से उनकी योजनाओं को लागू करने में प्रति सीईआर 5 हजार करोड़ रुपये का आवंटन का प्रस्ताव दिया गया है।

पर्यावरणीय रूप से सतत् यात्री प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए, हम शहरों के बीच विकास संयोजक के रूप में सात उच्च-गति रेल कॉरीडोर विकसित किए जाएंगे-

  1. मुंबई-पुणे
  2. पुणे-हैदराबाद
  3. हैदराबाद-बेंगलुरु
  4. हैदराबाद-चेन्नई
  5. चेन्नई-बेंगलुरु
  6. दिल्ली-वाराणसी
  7. वाराणसी-सिलीगुड़ी।

 

वित्त मंत्री ने कहा कि दूसरा कर्तव्य आकांक्षाओं को पूरा करना और क्षमता निर्माण करना है। सरकार के सतत् और सुधार उन्मुख प्रयासों के जरिए 25 करोड़ व्यक्ति गरीबी की रेखा से ऊपर उठ गए है।

चिकित्सा पर्यटन सेवाओं के लिए भारत को एक वैश्वक केन्द्र के रूप में बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्री ने राज्यों को सहायता देने के लिए एक योजना का प्रस्ताव दिया, जिसके तहत राज्य निजी क्षेत्र के सहयोग से पांच क्षेत्रीय चिकित्सा केन्द्र स्थापित कर सकते है। यह केन्द्र एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल भवन के रूप में कार्य करेंगे, जिनमें चिकित्सा, शिक्षा और शोध करने की सुविधाएं मौजूद होगी। इन केन्द्रों में आयुष केन्द्र, चिकित्सा केन्द्र, पर्यटन केन्द्र एवं स्वास्थ्य जांच, बाद के देखभाल और पुनर्वास की अवसंरचना होंगी। यह केन्द्र डॉक्टर और एएचपी के साथ-साथ स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए विभिन्न नौकरियों का विकल्प प्रस्तुत करेगे।

पशु चिकित्सा पेशेवरों की संख्या 20,000 तक करने के लिए ऋण से जुड़े पूंजीगत सब्सिडी का प्रस्ताव दिया गया है ताकि निजी क्षेत्र में पशु चिकित्सा और पारावेट कॉलेज, वेटेनरी, पशु चिकित्सालय, जांच प्रयोगशाला, प्रजनन सुविधा की स्थापना के लिए समर्थन दिया जा सके।

भारत का एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट, गेमिंग और कॉमिक्स (एवीजीसी) क्षेत्र एक बढ़ता हुआ उद्योग है। अनुमान है कि 2030 तक इस क्षेत्र में 20 लाख पेशेवरों की जरूरत होगी। वित्त मंत्री ने भारतीय रचना प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई को समर्थन देने का प्रस्ताव दिया, ताकि संस्थान 15,000 उच्च माध्यमिक विद्यालयों तथा 500 कॉलेजों में एवीजीसी कंटेट निर्माण लैब की स्थापना कर सके।

उच्च शिक्षा एसटीईएम संस्थानों में अध्ययन और प्रयोगशाला कार्य की लम्बी अवधि छात्राओं के लिए चुनौती पैदा करती है। वीजीएफ/पूंजीगत समर्थन के जरिए प्रत्येक जिले में लड़कियों के लिए एक छात्रावास की स्थापना की जाएगी।

वित्त मंत्री ने वर्तमान के राष्ट्रीय होटल प्रबंधन और केटररिंग प्रौद्योगिकी परिषद का उन्नयन करके राष्ट्रिय आतिथ्य संस्थान की स्थापना करने का प्रस्ताव रखा। यह शिक्षा जगत, उद्योग जगत और सरकार के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने आगे 20 पर्यटनों स्थलों में 10,000 गाइडों के कौशल का उन्नयन करने के लिए एक पायलट योजना का प्रस्ताव रखा। इसके लिए भारतीय प्रबंधन संस्थान के साथ साझेदारी में हाईब्रिड मोड में 12 सप्ताह के एक मानक उच्च गुणवत्ता वाला प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के जरिए गाइडों को प्रशिक्षित किया जाएगा।

खेलो इंडिया कार्यक्रम के जरिए खेल प्रतिभाओं को मार्गदर्शन व सहायता प्रदान करने के कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए वित्त मंत्री ने अगले दशक में खेल क्षेत्र को परिवर्तित करने के लिए खेलो इंडिया मिशन के शुभारंभ का प्रस्ताव रखा।। यह मिशन निम्न सुविधाएं प्रदान करेगा। क.) प्रशिक्षण केन्द्रों के समर्थन से प्रतिभा विकास के लिए एकीकृत तरीका ख.) कोच और सहायककर्मियों का प्रणालीगत विकास ग.) खेल विज्ञान और प्रौद्योगिकी का एकीकरण घ.) खेल संस्कृति को बढ़ावा देने तथा मंच प्रदान करने के लिए प्रतियोगिताएं और लीग ड.) प्रशिक्षण और प्रतियोगिता के लिए खेल अवसंरचना का विकास।

वित्त मंत्री ने कहा कि बजट का तीसरा कर्तव्‍य जो सबका साथ, सबका विकास के दृष्टिकोण के अनुरूप है, यह सुनिश्चित करता है कि किसानों की आय में वृद्धि हो, दिव्‍यांगजन सशक्‍त बनें, मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य और ट्रॉमा केयर तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कमजोर समूहों का सशक्तिकरण हो,  विकास और रोजगार के अवसरों में तेजी लाकर पूर्वोदय राज्‍यों और पूर्वोत्तर क्षेत्र की ओर ध्‍यान केंद्रित हो।

वित्त मंत्री ने एक भाषीय टूल – भारत विस्‍तार (कृषि संसाधनों तक पहुंच के लिए वर्चुअल एकीकृत प्रणाली)  – का प्रस्‍ताव किया जो एक बहुभाषीय एआई टूल है और जिसे एआई प्रणाली सहित कृषि संबंधी प्रणालियों के लिए आईसीएआर पैकेज सहित एग्रीस्‍टैक पोर्टल के रूप में एकीकृत किया गया है। इससे कृषि उत्‍पादकता में वृद्धि होगी, किसानों को उचित निर्णय लेने में सक्षम बनाएगा और अनुकूल परामर्श सहायता प्रदान करते हुए जोखिम को कम करेगा।

लखपति दीदी कार्यक्रम की सफलता को आगे बढ़ाते हुए,  संवर्धित और नवाचार वित्तपोषण के माध्‍यम से क्‍लस्‍टर स्‍तरीय संगठनों के भीतर सामुदायिक स्‍वामित्‍व वाले खुदरा आउटलेट के रूप में स्‍व-सहायता उद्यम (शी) मार्ट स्‍थापित किए जाएंगे।

वित्त मंत्री ने मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य और ट्रॉमा केयर पर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए निमहांस-2 की स्‍थापना की घोषणा की और रांची तथा तेजपुर में राष्‍ट्रीय मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य संस्‍थानों को शीर्ष क्षेत्रीय  संस्‍थानों के रूप में अपग्रेड करने की बात कही।

वित्त मंत्री ने दुर्गापुर में बेहतर संपर्क नोड के साथ एकीकृत पूर्वी तट औद्योगिक कॉरीडोर के विकास, 5 पूर्वोदय राज्‍यों में 5 पर्यटन स्‍थलों के निर्माण और 4000 ई-बसों के प्रावधान का प्रस्‍ताव रखा। उन्‍होंने अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बौद्ध सर्किट के विकास हेतु एक योजना का प्रस्‍ताव रखा। इस योजना में मंदिरों और मठों का संरक्षण, तीर्थस्‍थल भाषांतरण केंद्र, संपर्क एवं तीर्थ यात्रियों की सुविधाएं शामिल होंगी।

राजकोषीय समेकन

ऋण से जीडीपी अनुपात संशोधित अनुमान 2025-26 में जीडीपी के 56.1 प्रतिशत की तुलना में, बजट अनुमान 2026-27 में जीडीपी के 55.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। गिरता हुआ ऋण और जीडीपी अनुपात धीरे-धीरे ब्‍याज भुगतान पर व्‍यय को कम करके प्राथमिक क्षेत्र के व्‍यय के लिए संसाधनों को मुक्‍त करेगा। संशोधित अनुमान 2025-26 में, राजकोषीय घाटे का अनुमान जीडीपी के 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो 2025-26 के बजट अनुमान के बराबर है। ऋण समेकन की नई राजकोषीय दूरदर्शिता के अनुरूप, बजट अनुमान 2026-27 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

संशोधित अनुमान 2025-26

गैर-ऋण प्राप्तियों का  संशोधित अनुमान 34 लाख करोड़ रुपये है। जिनमें से केंद्र की निवल कर प्राप्तियां 26.7 लाख करोड़ रुपये है। कुल व्‍यय का संशोधित अनुमान 49.6 लाख करोड़ रुपये है जिनमें से पूंजीगत व्‍यय लगभग 11 लाख करोड़ रुपये है।

बजट अनुमान 2026-27

वर्ष 2026-27 में गैर-ऋण प्राप्तियां और कुल व्‍यय का अनुमान क्रमश: 36.5 लाख करोड़ रुपये और 53.5 लाख करोड़ रुपये है। केंद्र की निवल कर प्राप्तियों का अनुमान 28.7 लाख करोड़ रुपये है। राजकोषीय घाटे के वित्तपोषण हेतु, दिनांकित प्रतिभूतियों से निवल बाजार उधारी का अनुमान 11.7 लाख करोड़ रुपये है। शेष वित्तपोषण छोटी बचतों और अन्‍य स्रोतों से आने की संभावना है। सकल बाजार उधारी का अनुमान 17.2 लाख करोड़ रुपये है।

भाग-ख

प्रत्यक्ष कर

प्रत्यक्ष करों में आम बजट 2026-2027 में कई नए सुधार प्रस्तावित हैं। नया आयकर अधिनियम 2025 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगा। इसके अतिरिक्त, सरलीकृत आयकर नियमावली और प्रपत्रों को शीघ्र ही अधिसूचित कर दिया जाएगा। प्रपत्रों को इस प्रकार पुनः डिजाइन किया गया है कि आम नागरिक इसे बिना किसी कठिनाई के इसका अनुपालन कर सके।

टीसीएस दरों में कटौती भी प्रस्तावित है। विदेश यात्रा कार्यक्रम पैकेज की बिक्री पर बिना किसी राशि निर्धारण के मौजूदा 5 प्रतिशत और 20 प्रतिशत से कम करते हुए 2 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अतिरिक्त, शिक्षा प्राप्त करने और चिकित्सा उद्देश्यों के के लिए उदारीकृत धनप्रेषण योजना (एलआरएस) के अतंर्गत टीसीएस दर को 5 प्रतिशत से कम करके 2 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया है।

कार्यबल सेवाओं की आपूर्ति को टीडीएस के प्रयोजनार्थ विशिष्ट रूप से संविदाकारों को भुगतान के दायरे में लाने का प्रस्ताव है। इन सेवाओं पर टीडीएस की दर 1 प्रतिशत अथवा 2 प्रतिशत मात्र होगी। छोटे करदाताओं के लिए एक योजना का प्रस्ताव है जिसमें नियम आधारित स्वचालित प्रक्रिया से, कर निर्धारण अधिकारी के समक्ष आवेदन दाखिल करने के स्थान पर कम अथवा शून्य कटौती प्रमाण-पत्र प्राप्त करना संभव हो सकेगा। इसके अतिरिक्त, एक सांकेतिक शुल्क के भुगतान पर विवरणियों को संशोधित करने के लिए उपलब्ध समय को 31 दिसम्बर से 31 मार्च तक बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। इसके अतिरिक्त, कर विवरणियों को दाखिल करने के लिए अगल-अलग समय-सीमा रखने का भी प्रस्ताव है।

छात्रों, युवाओं पेशेवरों, तकनीकी कर्मचारियों, अन्यत्र चले गए अनिवासी भारतीयों और ऐसे अन्य छोटे करदाताओं की व्यावहारिक समस्याओं को दूर करने के लिए, इन करदाताओं के लिए एक निश्चित आकार के नीचे आय अथवा परिसंपत्ति को प्रकट करने के लिए 6 माह की विदेशी परिसंपत्ति प्रकटीकरण योजना शुरू करने का प्रस्ताव है।

दंड और अभियोजन को युक्तिसंगत बनाना

दंड और अभियोजन को युक्तिसंगत बनाने के लिए आम बजट 2026-27 में  कार्यवाहियों की विविधता कम करने का प्रस्ताव रखा गया है। कर निर्धारण एवं दंड कार्यवाहियों को एक सामान्य आदेश के माध्यम से एकीकृत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, पूर्व-भुगतान की मात्रा 20 प्रतिशत से कम करके 10 प्रतिशत की जाएगी और इसकी गणना केवल मुख्य क्रमांक पर होती रहेगी। मुक्दमेबाजी को कम करने के लिए एक अतिरिक्त उपाय के रूप में करदाता को संगत वर्ष के लिए लागू दर के अतिरिक्त 10 प्रतिशत कर दर के साथ विवरणी को पुनर्निर्धारण कार्यवाहियों के पश्चात भी अद्यतन करने की अनुमति दी जाएगी।

बजट में कम कर की सूचना एवं गलत सूचना देने के मामलों में, दंड और अभियोजन से उन्मुक्ति प्रावधान को विस्तारित करने का प्रस्ताव है। ऐसे मामलों में करदाता को देय कर और ब्याज के अलावा अतिरिक्त आयकर के रुप में कर राशि के 100 प्रतिशत का भुगतान करना अपेक्षित होगा। इसके अतिरिक्त आयकर अधिनियम के अतंर्गत अभियोजन ढ़ांचे को युक्तिसंगत बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। लेखा बहियों और दस्तावेजों को प्रस्तुत न करना तथा वस्तु रुप में भुगतान के मामले में टीडीएस का भुगतान करने की आवश्यकता अपराध नहीं होगी। 20 लाख रुपये से कम के सकल मूल्य वाली अचल विदेशी परिसम्पत्ति का गैर-प्रकटीकरण करने पर फिलहाल कोई दंड नहीं है। दिनांक 01.10.2024 की पुरानी तिथि से प्रभावी उनको अभियोजन से उन्मुक्ति का प्रस्ताव रखा गया है।

सहकारिता

श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज संसद में अपने बजट भाषण में कहा कि, अपने सदस्यों द्वारा जुटाए या उत्पादित दुग्ध, तिलहन, फल अथवा सब्जियों की आपूर्ति में संलग्न प्राथमिक सहकारी समितियों के लिए कटौती की पहले से ही अनुमति है, अब उनके सदस्यों के लिए उत्पादित पशु चारा और कपास के लिए बीज की आपूर्ति को इस कटौती में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है। नई कर व्यवस्था के अंतर्गत अंतर-सहकारी समिति लाभांश आय को इसके सदस्यों में आगे संवितरण की सीमा तक कटौती के रूप में अनुमति दिए जाने का प्रस्ताव है। किसी अधिसूचित राष्ट्रीय सहकारी संघ द्वारा दिनांक 31.01.2026 तक कंपनियों में किए गए उनके निवेश पर प्राप्त लाभांश आय पर 3 वर्ष की अवधि के लिए छूट देने का भी प्रस्ताव है। यह छूट केवल तभी प्रदान की जाएगी जब उक्त लाभांश को इसके सदस्य सहकारी समितियों में आगे वितरण किया जाएगा।

भारत के विकास इंजन के रूप में आईटी क्षेत्र को सहायता

भारत की विकास यात्रा में आईटी सेक्टर के महत्व को रेखांकित करते हुए बजट में सॉफ्टवेयर विकास सेवाओं, आईटी समर्पित सेवाओं, ज्ञान प्रक्रिया आउटसोर्सिंग सेवाओं और सॉफ्टवेयर विकास से संबंधित संविदागत अनुसंधान और विकास सेवाओं को उन पर लागू 15.5 प्रतिशत के एक समान सेफ हार्बर मार्जिन के साथ सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं की एकल श्रेणी के अंतर्गत सम्मिलित किए जाने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त, आईटी सेवाओं के लिए सेफ हार्बर प्राप्त करने की सीमा को 300 करोड़ रुपये से पर्याप्त रुप से बढ़ाकर 2000 करोड़ रुपये किए जाने का प्रस्ताव है। आईटी सेवाओं के लिए सेफ हार्बर का अनुमोदन एक स्वचालित नियम आधारित प्रक्रिया द्वारा किया जाएगा और एक बार किसी आईटी कम्पनी द्वारा इसके लिए आवेदन करने पर कंपनी की इच्छानुसार इसी सेफ हार्बर को 5 वर्षों की अवधि के लिए जारी रखा जा सकता है।

अग्रिम मूल्य निर्धारण करार (एपीए) करने की इच्छुक आईटी सेवा कंपनियों के लिए आईटी सेवाओं हेतु एकपक्षीय एपीए प्रक्रिया को तेज करने का प्रस्ताव किया गया है, जिसे दो वर्ष की अवधि के भीतर पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। करदाताओं के अनुरोध पर 2 वर्ष की अवधि को आगे 6 महीने के लिए बढ़ाया जा सकता है। एपीए में शामिल होने वाली कंपनी को उपलब्ध संशोधित विवरणी की सुविधा उसकी संबद्ध संस्थाओं को भी प्रदान किए जाने का प्रस्ताव है।

वैश्विक व्यापार और निवेश आकर्षित करना

संसद में आम बजट 2026-27 प्रस्तुत करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि ऐसी विदेशी कंपनी के लिए वर्ष 2047 तक कर रियायत प्रदान करने का प्रस्ताव है जो भारत से डाटा केन्द्र सेवाओं का उपयोग करके वैश्विक स्तर पर क्लाउड सेवाएं प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि यदि डाटा सेंटर सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनी एक संबंधित कंपनी है तो, उस लागत पर 15 प्रतिशत का सेफ हार्बर प्रदान का भी प्रस्ताव रखा गया है। इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण के लिए इनवॉयस बैल्यू के 2 प्रतिशत के प्रॉफिट मार्जिन पर किसी बांडेड वेयरहाउस में कंपोनेंट वेयरहाउस के लिए अनिवासियों को सेफ हार्बर प्रदान करने का प्रस्ताव है। लगभग 0.7 प्रतिशत का परिणामी कर प्रतिस्पर्धी क्षेत्राधिकार के मुकाबले काफी कम होगा।

भारत में टोल विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए ऐसे किसी अनिवासी को आयकर से 5 वर्षों के लिए छूट प्रदान करने का प्रस्ताव रखा गया है जो बॉन्डेड क्षेत्र में किसी टोल विनिर्माता को पूंजीगत वस्तुएं, उपकरण अथवा टूलिंग उपलब्ध कराता  है। वैश्विक प्रतिभा के विशाल पूल को भारत में लम्बी अवधि के लिए काम करने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए अधिसूचित योजनाओं के अतंर्गत 5 वर्षों की प्रवास अवधि के लिए अनिवासी विशेषज्ञ की वैश्विक (गैर-भारत स्रोत) आय के लिए छूट प्रदान करने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त उन सभी अनिवासियों को न्यूनतम वैकल्पिक कर (एमएटी) से छूट प्रदान की जाएगी, जो अनुमानित आधार पर कर का भुगतान करते हैं।

कर प्रशासन

——–

सिविल और रक्षा विमानन क्षेत्र में सिविलियन, प्रशिक्षण और अन्य एयरक्राफ्ट के विनिर्माण के लिए अपेक्षित घटकों और पुर्जों पर मूल सीमा शुल्क में छूट दी जाएगी और रक्षा क्षेत्र इकाइयों द्वारा अनुरक्षण, मरम्मत अथवा ओवरहॉल जरूरतों में प्रयोग किए जाने वाले विमानों के पुर्जों के विनिर्माण के लिए आयातित कच्चे माल पर मूल सीमा शुल्क में छूट प्रदान की जाएगी।

इसके अलावा विशेष एक बारगी उपाय के रूप में विशेष आर्थिक क्षेत्र में पात्र विनिर्माण इकाइयों द्वारा रियायती शुल्क दरों पर घरेलू प्रशुल्क क्षेत्र (डीटीए) को बिक्री की सुविधा प्रदान करने की पेशकश की गई  है।

जीवन जीने की सुगमता बढ़ाने के लिए वित्त मंत्री ने कहा कि निजी उपयोग के लिए सभी शुल्क योग्य आयातित वस्तुओं पर प्रशुल्क दर को 20 प्रतिशत से कम करते हुए 10 प्रतिशत किया जाएगा। 17 औषधियों अथवा दवाओं पर मूल सीमा शुल्क में छूट दी जाएगी। उपचार में प्रयुक्त औषधियों, दवाओं और विशेष चिकित्सा प्रयोजन खाद्य (एफएसएमपी)  के निजी आयातों पर शुल्क से छूट के प्रायोजनार्थ 7 अतिरिक्त असाधारण रोगों को जोड़ा जाएगा।

सीमा शुल्क प्रक्रिया

        वस्तुओं के सुगम और त्वरित संचलन के लिए सीमा शुल्क प्रक्रियाओं में कम से कम हस्तक्षेप होगा। इसके अलावा टियर 2 और टियर 3 प्राधिकृत प्रचालकों जिन्हें एईओ कहा जाता है, के लिए शुल्क स्थगन अवधि को 15 दिन से बढ़ाकर 30 दिन किया जाएगा। पात्र विनिर्माताओं – आयातकों को भी यही सुविधा प्रदान की जाएगी। सीमा शुल्कों पर बाध्यकारी अग्रिम नियम की वैधता अवधि को वर्तमान 3 वर्ष  से बढ़ाकर 5 वर्ष किये जाने  का प्रस्ताव है। सरकारी एजेंसियों को उनके कार्गो के समाशोधन में अधिमान्य व्यवहार हेतु एईओ प्रत्यायन का लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

बजट में सीमा शुल्क भंडारण फ्रेमवर्क को स्व-प्रकटन, इलेक्ट्रॉनिक  ट्रेकिंग और जोखिम आधारित लेखा परीक्षा के साथ भंडार संचालक – केंद्रित प्रणाली में बदला जाएगा।

व्यापार करने की सुगमता

        व्यापार करने की सुगमता के लिए विविध प्रकार के कदम उठाए गए हैं। उदाहरण के लिए विभिन्न सरकारी एजेंसियों से कार्गों समाशोधन के लिए अपेक्षित अनुमोदनों की प्रक्रिया को इस वित्त वर्ष के अंत तक एकल और परस्पर जुड़े हुए डिजिटल विंडो के माध्यम से निर्बाध बनाया जाएगा। जिन वस्तुओं के लिए किसी अनुपालन की अपेक्षा नहीं है, उन वस्तुओं को आयातक द्वारा ऑनलाइन पंजीकरण पूरा करने के तत्काल बाद सीमा शुल्क द्वारा समाशोधित किया जाएगा। सभी सीमा शुल्क प्रक्रियाओं के लिए एकल, एकीकृत और मापनीय प्लेटफॉर्म के रूप में सीमा शुल्क एकीकृत प्रणाली (सीआईएस) 2 वर्षों में शुरू की जाएगी।  इसके अलावा गैर सन्निविष्ट स्कैनिंग और उन्नत इमेजिंग तथा जोखिम आकलन हेतु एआई प्रौद्योगिकी का उपयोग सभी प्रमुख पत्तनों में प्रत्येक कंटेनर को स्केन करने के उद्देश्य से चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।

        केंद्रीय बजट 2026-27 विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में अथवा बीच समुद्र में मछली पकड़ने वाली भारतीय नौकाओं द्वारा पकड़ी गई मछली को शुल्क मुक्त बनाता है। विदेशी पत्तन पर ऐसी मछली की उतराई को निर्यात की वस्तु के रूप में माना जाएगा। बजट भारत के छोटे व्यवसायों, कारीगरों और स्टार्ट-अप की अकांक्षाओं में सहायता प्रदान करने के लिए कुरियर निर्यातों पर प्रति खेप 10 लाख रुपए की वर्तमान मूल्य सीमा को पूरी तरह हटाने की भी पेशकश करता है।

        अंतर्राष्ट्रीय यात्रा के दौरान सामान की निकासी को शासित करने वाले प्रावधानों में संशोधन किया जाएगा। संशोधित नियमों से वर्तमान समय की यात्रा संबंधी वास्तविकताओं के अनुरूप शुल्क मुक्त भत्ते में वृद्धि होगी। इसके अलावा सभी बकायों का भुगतान करके विवादों का निपटान करने के इच्छुक ईमानदार करदाता दंड के बदले अतिरिक्त राशि का भुगतान करके अपने मामलों को बंद करने में सक्षम होंगे। 

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Tags: Summary of the Union Budget 2026-27union budget 2026
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