कोलकाता : भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा, “ग्लोबल अनिश्चितता के दौर में भारत ने एनर्जी सिक्योरिटी (ऊर्जा सुरक्षा) के मामले में अच्छा काम किया है।” MCCI ने सोमवार, 28 सितंबर 2026 को कोलकाता के द पार्क होटल में भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी के साथ ‘भारत की एनर्जी सिक्योरिटी: जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता से निपटना’ विषय पर एक खास सेशन आयोजित किया। श्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि हर संकट में एक चुनौती होती है। चुनौती से ही नए मौके मिलते हैं।
जियोपॉलिटिकल उथल-पुथल से एनर्जी सिक्योरिटी पर आई अनिश्चितता का ज़िक्र करते हुए श्री पुरी ने कहा कि यह अनिश्चितता नहीं, बल्कि उथल-पुथल है। सरकार की ज़िम्मेदारी 1.4 अरब लोगों को उतार-चढ़ाव से बचाना था। ग्लोबल एनर्जी की कीमतें 70 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़ गई थीं, जबकि भारत में कीमतें काफी कम थीं। उन्होंने कहा, “ऐसा प्रधानमंत्री के उस संकल्प की वजह से हुआ, जिसका मंत्र था – उपलब्धता और किफायती दाम सुनिश्चित करना। एक्साइज़ ड्यूटी कम करके पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें तीन बार घटाई गईं।” मंत्री जी का मानना था कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियाँ भारी नुकसान (अंडर-रिकवरी) झेल रही हैं। वे अच्छे कॉर्पोरेट सिटिज़न हैं। लेकिन हम उन्हें डूबने नहीं देंगे। जब कीमतें ज़्यादा होती हैं, तो अपस्ट्रीम कंपनियाँ अच्छा करती हैं, जबकि डाउनस्ट्रीम कंपनियों को नुकसान होता है।
उनके अनुसार, देश ने अब तक इस स्थिति को अच्छी तरह संभाला है। “लेकिन यह दुनिया अनिश्चितताओं से भरी है। उन्होंने कहा कि संकट के दौरान, किसी भी रिटेल आउटलेट पर सामान की कमी नहीं हुई। श्री पुरी ने कहा कि दुनिया में असल में ऊर्जा की कोई कमी नहीं है। कच्चा तेल उपलब्ध है। समस्या सप्लाई रूट की है। लेकिन अगर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद हो जाए तो क्या होगा? दुनिया की लगभग 40 प्रतिशत ऊर्जा सप्लाई रुक जाएगी।
उनकी चिंता कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर नहीं थी। उनकी असली चिंता LPG सप्लाई को लेकर थी क्योंकि देश में 33.5 करोड़ LPG कनेक्शन हैं, जो लगभग पूरी आबादी को कवर करते हैं। LNG भी है, लेकिन ज़्यादातर लोग LPG पर निर्भर हैं। यह बताते हुए कि पिछले 50 वर्षों में पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था में गिरावट आई है, उन्होंने कहा कि हाल की घटनाओं के कारण पश्चिम बंगाल मुख्य केंद्र बन जाएगा।
उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल की आर्थिक प्रगति केंद्र की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसीलिए ‘इंडिया एनर्जी वीक’ यहाँ आयोजित किया जा रहा है।” श्री पुरी ने कहा कि केंद्र ने खोज और उत्पादन (E&P) के लिए 84,000 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। इससे पहले, MCCI के अध्यक्ष श्री मुनीश झाझरिया ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा प्राथमिक ऊर्जा उपभोक्ता है और अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का लगभग 85% आयात पर निर्भर है।
उन्होंने कहा कि भारत के कारोबारी समुदाय के लिए सस्ती ऊर्जा उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि उपलब्ध ऊर्जा।उन्होंने आगे कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा चोकपॉइंट्स (ऊर्जा आपूर्ति के अहम रास्ते) में से एक है, जहाँ से दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल और LNG का प्रवाह होता है।अंत में, उन्होंने बताया कि भारत के पास वर्तमान में 5.33 मिलियन टन की रणनीतिक पेट्रोलियम रिज़र्व क्षमता है, जो लगभग 9.5 दिनों की कच्चे तेल की ज़रूरत को पूरा करती है। इसके अलावा, देश के पास कुल मिलाकर कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की भंडारण क्षमता है जो लगभग 74 दिनों की ज़रूरत को पूरा कर सकती है, जिसमें तेल विपणन कंपनियों के पास मौजूद स्टॉक भी शामिल है।”
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